Wednesday, March 16, 2022

केज तहसील के विडा येवता यहां निकलती है गधे की सवारी. दामाद के साथ निभाई जाती है 85 साल पुरानी परंपरा.


ऐसा ही हुआ था, 85 साल पहले.।बीड जिले की केज तहसील के विडा येवता गांव में हुआ ये कि देशमुख परिवार के एक दामाद ने होली में रंग लगवाने से मना कर दिया. ।तब उनके ससुर ने उन्हें रंग लगाने के लिए मनाने की कोशिश में लग गए. ।उन्होंने फूलों से सजा हुआ एक गधा मंगवाया, उस पर दामाद को बिठाया और फिर उसे पूरे गांव में घुमाया गया.।दामाद को गधे पर बिठा कर मंदिर तक ले जाया गया. ।वहां ले जाकर दामाद की आरती उतारी गई.। उन्हें नए कपड़े और सोने की अंगूठी दी गई.। वहां उनका मुंह मीठा कराया और फिर रंग लगाया गया.।हर साल उस गांव में ऐसा होता रहा और फिर यह एक परंपरा बन गई.।अब इस गांव में हर साल होली से पहले ऐसे दामाद को ढूंढा जाता है, जिनकी नई-नई शादी हुई हो। सबसे नए दामाद के साथ होली पर यह परंपरा निभाई जाती है. कई बार तो गांव के कुछ दामाद इससे बचने के लिए छिपकर भागने की कोशिश करते हैं.। लेकिन गांव के लोगों द्वारा उनपर पूरा पहरा रखा जाता है. ।ताकि हर हाल में यह परंपरा निभाई जा सके.।पिछले साल कोरोना की वजह से यह परंपरा नहीं निभाई जा सकी थी। इस बार  शुक्रवार को परंपरा निभाने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

कोरोना के चलते  बंद थी परंपरा
 बीड के केज तहसील से विडा येवता गांव में कोरोना के चलते पिछले  साल मेंसे दामाद को गधे पर सवारी की  परंपरा निभाई नही गई ।किंतु इस साल  दामाद को शुक्रवार को होली के दिन गधे पर बैठाकर सवारी की तैयारियां  पूरी हो चुकी है ।

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